नई दिल्ली: चुनावी सरगर्मियों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग ने कानूनी रूप ले लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर खरगे द्वारा की गई एक विवादित टिप्पणी पर भारतीय चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत मंगलवार को चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। गठबंधन राजनीति पर चर्चा करते हुए खरगे ने पीएम मोदी को लेकर विवादास्पद शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा था, "ये अन्नाद्रमुक के लोग मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वह (मोदी) एक आतंकवादी हैं... वह समानता और न्याय में विश्वास नहीं करते।"इस टिप्पणी के सामने आते ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। भाजपा ने इसे कांग्रेस की ओछी मानसिकता बताते हुए कड़ी निंदा की और इसे चुनाव में कांग्रेस की हताशा का प्रतीक करार दिया।

चुनाव आयोग की कार्रवाई
आयोग ने खरगे के इस बयान को 'आदर्श आचार संहिता' का सीधा उल्लंघन माना है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले मतदान से महज एक दिन पहले जारी इस नोटिस में चुनाव आयोग ने खरगे से अगले 24 घंटों के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है। आयोग यह तय करेगा कि आगे क्या दंडात्मक कार्रवाई की जानी है।

खरगे ने दी सफाई
विवाद बढ़ने और कानूनी शिकंजा कसते देख कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान का बचाव किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफाई देते हुए खरगे ने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया:"मैंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। मेरा आशय यह था कि मोदी सरकार अपने सत्ता और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है। वे केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से विपक्षी दलों और आम लोगों को डरा रहे हैं और देश के लोकतांत्रिक ढांचे को आतंकित कर रहे हैं।"कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए हरसंभव हथकंडे अपना रहा है, जिसे वे अपनी भाषा में 'आतंकवादी शैली' के समान मानते हैं।