चंबल के बीहड़ का रहस्यमयी मंदिर, आधी रात की आरती में जुटते हैं भक्त
Rawatpura Sarkar: चंबल का नाम सुनते ही ऊंचे-नीचे बीहड़, घने जंगल और डकैतों के आंतक के किस्से याद होंगे. लेकिन अब कहानी कुछ और ही है. चंबल का इलाका अब धीरे-धीरे धार्मिक आस्था और आत्यधमिक विश्वास का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है. मध्य प्रदेश के भिंड जिला मुख्यालय के पास स्थित रावतपुरा धाम आज श्रद्धालुओं के लिए बड़ा और एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया है.
रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम
रावतपुरा धाम में आधी रात को होने वाली विशेष आरती ने इस धाम को रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम बना दिया है. कहते हैं, उस पल जो भी वहां मौजूद होता है उसकी किस्मत एक नया मोड़ ले लेती है. सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि इस धाम में… न कोई जानवर एक-दूसरे से लड़ता है और न ही कोई अशांति फैलाता हैं, जैसे किसी अदृश्य शक्ति का पहरा हो. लोगों का मानना है कि यहां मांगी जाने वाली हर मुराद पूरी होती है. यहां पर साक्षात हनुमान जी विराजते हैं.
रात ठीक 12 बजे विशेष आरती
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावतपुरा सरकार धाम में रात ठीक 12 बजे विशेष आरती होती है. जैसे ही घड़ी में 12 बजते हैं, मंदिर परिसर शंख, घंटियों और मंत्रोच्चार की ध्वनि से गूंज उठता है. आरती के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं. बीहड़ों के बीच बस ये धाम शांति, हरियाली और विश्वास का प्रतीक बन चुका है. जहां कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब संख और घंटियों की ध्वनियां सुनाई देती हैं.
आधी रात के समय बदल जाता है महौल
विस्तार न्यूज की टीम ने जब मंदिर के पास रहने वाले 85 वर्षीय सियाराम शास्त्री जी से यहां की चमत्कारी शक्तियों और रहस्यमयी कहानियों के बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि आधी रात के समय यहां का माहौल पूरी तरह बदल जाता है. उनके अनुसार, जब पूरा इलाका शांत होता है, तब मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगती है और आरती की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है. उनकी इन बातों ने इस धाम से जुड़े रहस्य को और गहरा कर दिया है.
1991 के बाद बदली धाम की तस्वीर
वर्तमान जो धाम का स्वरूप नजर आता है असल में ये हमेशा से ऐसा नहीं था. इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के मुताबिक रावतपुरा धाम का आधुनिक स्वरूप 1991 के बाद सामने आया. जब रविशंकर महाराज यहां पहुंचे. उस समय ये इलाका एकदम सुनसान, घने जंगलों और टीलों से घिरा हुआ रहता था. धीरे-धीरे यहां पर धार्मिक गतिविधियां बढ़ती गई औल लोगों की आस्था ने इस स्थान को भव्य धाम में बदल दिया.
धाम के आसपास अनोखी शांति
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धाम के आसपास एक अनोखी शांति महसूस होती है. उनका दावा है कि यहां प्राकृतिक दुश्मन माने जाने वाले जानवरों के बीच भी संघर्ष नहीं होता. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सांप-नेवला या कुत्ता-बिल्ली जैसे प्राकृतिक दुश्मनों के बीच भी लड़ाई नहीं होती, मानों किसी अदृश्य शक्ति का यहां पहरा हो.

आपत्तिजनक आचरण पर कड़ा रुख, जवाब नहीं तो सीधी कार्रवाई
Amit Shah का हमला—‘बंगाल में खाता भी नहीं खोल पाएगी कांग्रेस’, Rahul Gandhi पर साधा निशाना
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर, ईरानी सेना की जहाजों पर फायरिंग
Mallikarjun Kharge के बयान पर बवाल, BJP प्रतिनिधिमंडल ने EC से की मुलाकात
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बना रनवे, वायुसेना ने दिखाया दमखम